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Ekta Sharma

Tragedy Inspirational

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Ekta Sharma

Tragedy Inspirational

बीता साल

बीता साल

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नया साल हमेशा की तरह पुराना हो गया,

और फिर नए साल का इंतजार हो गया।

मेरी तरसती निगाहें बरस कर रह गई,

क्योंकि मेरी सुनी गोद सुनी ही रह गई।


इस साल भी सपने सजाए थे,

दिल में ख्वाबों के महल बनाए थे।

हर साल एक उम्मीद की किरण लाता है,

फिर जाता हुआ नाउम्मीदी ही दे जाता है।


हर साल यूं ही आंखों में नमी रहती है,

सब कुछ होते हुए भी जीवन में कमी रहती है।

इस साल तो कोरोना भी देशपर हावी हुआ,

वो भी सब त्यौहारों और खुशियों पर भारी हुआ।


नया साल सबके जीवन में बहुत सारी खुशियां ले आए,

मेरी और सबकी उम्मीदें भी पूरी हो जाए।


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