Rajeev Kumar
Thriller
भयानक रात का जादू
आपके हौसलों से काबू
चीर देते हैं भयानक रात का सीना
आपके दिल का उफनता सफीना
भयानक रात का जीना दुश्वार
जिसको अपने हौसले में इख्तयार।
है मिलन की बे...
वक्त के दाँव ...
पथ है अवरोध भ...
जद्दोजहद
छवी
बाढ़
जैसी भी सूरत
यादों के उजाल...
जिंदगी
हौेसला
मगर कौन जाने ख्वाबों को मूंद कहीं एक सूर्य अस्त भी हुआ। मगर कौन जाने ख्वाबों को मूंद कहीं एक सूर्य अस्त भी हुआ।
जलन मेरे सीने के अन्दर है तुमबिन मिलन दिलका दिलसे सनम कुछ नहीं है। जलन मेरे सीने के अन्दर है तुमबिन मिलन दिलका दिलसे सनम कुछ नहीं है।
बेटी को फटकारते, जीते जी मारते मिले ऐसी ना फिर, दुत्कार मां दुत्कार मां बेटी को फटकारते, जीते जी मारते मिले ऐसी ना फिर, दुत्कार मां दुत्कार मां
मिला हूँ बहुत शिक्षकों से मैं अपनी ज़िंदगी में, पर सर को मेरे दिल में एक अलग ही जगह बना मिला हूँ बहुत शिक्षकों से मैं अपनी ज़िंदगी में, पर सर को मेरे दिल में एक अलग ह...
मौसम का बदलना दस्तूर है, शायद दिल को भी ये कबूल है।। मौसम का बदलना दस्तूर है, शायद दिल को भी ये कबूल है।।
इस निविड़ बने जीवन में फिर से आनंद की इक लहर बह जाने दे। इस निविड़ बने जीवन में फिर से आनंद की इक लहर बह जाने दे।
मेरी अपनी सल्तनत मेरा अपना राज अकेली मैं सम्राज्ञी, पूरी करूँ मन की प्यास, मेरी अपनी सल्तनत मेरा अपना राज अकेली मैं सम्राज्ञी, पूरी करूँ मन की प्यास,
हर पल पल इज़हार कमिल-तरिन किया एक पल इकरार शिकस्त-फरिश्ता किया ! हर पल पल इज़हार कमिल-तरिन किया एक पल इकरार शिकस्त-फरिश्ता किया !
लेकिन अपनी छाप यहां छोड़ना हैं, यादों में जीना, खुद को अमर करना हैं। लेकिन अपनी छाप यहां छोड़ना हैं, यादों में जीना, खुद को अमर करना हैं।
जो मिट गया, वही बचा है, यही सत्य समझ में आए। न चंदन की महक बसे है, न फूलों की गंध यहाँ जो मिट गया, वही बचा है, यही सत्य समझ में आए। न चंदन की महक बसे है, न फूलों की...
यूँ इस दुनिया से जाने के बाद भी हमारी कहानी को … उस के शब्दों को आबाद करेंगे यूँ इस दुनिया से जाने के बाद भी हमारी कहानी को … उस के शब्दों को आबाद करेंगे
जिसे मैंने जाना …… यशवी और उसने समझाया है …. जिसे मैंने जाना …… यशवी और उसने समझाया है ….
अधर्म राह का करके पालन और असत्य का उच्चारण , धर्मराज से धर्म लुप्त था और कृष्ण से सत्य अधर्म राह का करके पालन और असत्य का उच्चारण , धर्मराज से धर्म लुप्त था और कृष्...
हां, मैं महिला हूं शायद इसीलिये ये सब कर पाती हूं। हां, मैं महिला हूं शायद इसीलिये ये सब कर पाती हूं।
व्यथा व्यथा
मैं तुमको अपना बनाने आ रहा हूँ हमेशा हमेशा के लिए बस तुम मेरा इंतज़ार करना। मैं तुमको अपना बनाने आ रहा हूँ हमेशा हमेशा के लिए बस तुम मेरा इंतज़ार करन...
भारत की जय भारत की जय कंठ कंठ से गूँज उठने लगे। भारत की जय भारत की जय कंठ कंठ से गूँज उठने लगे।
पर धर्म के अंधों को कैसे ओ नियति मैं समझाऊँगा पर धर्म के अंधों को कैसे ओ नियति मैं समझाऊँगा
कटे हुए नर मस्तक थे जो , उनको हाथ दबाया। कटे हुए नर मस्तक थे जो , उनको हाथ दबाया।
यादें हैं बचपन की चुलबुली सी शुभकामनायें आप सब को होली की ! यादें हैं बचपन की चुलबुली सी शुभकामनायें आप सब को होली की !