भूलना चाहती हूँ
भूलना चाहती हूँ
भूलना चाहती हूँ
तुम्हारी आपेक्षाएँ
झूठे वायदे
कड़वी यादें
टूटते रिश्ते
अकेला छोड़
पलायन को आतुर तुम्हारे कदम
सामाजिक वर्जनाएँ
सम्वेदनहीन सीमाएँ
भोग्या होने का एहसास
नग्न शरीरों की नुमाइश
शरीर पर पड़े घाव
तुम्हारे लिये खेल बने
मातृत्व वाली
घायल छाती
नुचते स्तन
औरतों की मंडियाँ
बेचे जाने की यादें
दो दो दीनार
मोल बिकता शरीर
भूलना चाहती हूँ
