STORYMIRROR

मधुलिका साहू सनातनी

Abstract

3  

मधुलिका साहू सनातनी

Abstract

आँसू

आँसू

1 min
310

दिल का दर्द बयाँ करते आँसू 

मन को भी हल्का कर

कहाँ से चुराऊँ

इन आंसुओं को

यही तो हैं

जो छलक छलक

दिल के घावों पर

मरहम रख देते हैं।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract