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मधुलिका साहू सनातनी

Abstract Inspirational

4.5  

मधुलिका साहू सनातनी

Abstract Inspirational

इच्छाएँ

इच्छाएँ

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जीवन के पृष्ठ
बदलते ही जा रहे हैं
जरा जल्दी जल्दी ही
शायद कुछ आपाधापी में
कितनी ख्वाइशें
रह गयी अधूरी
अभी खुल कर
जी कहाँ पायी थी
सपनो की उड़ान
उड़ कहाँ पायी थी
आसमान में
उड़ने के सपने अधूरे है
सागर के गोते
हाथ फैलाये बुला रहे
मछलियों संग तैरना बाकी
जलपरी बनना भी बाकी 
चाँद की सैर भी बाकी
तारों को छूना अभी बाकी
सबसे ज्यादा
अभी तो तुम्हारा प्यार
भी अधूरा है
पड़नाती पड़पोतों संग
छुपा छुपाई अभी बाकी है



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