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कवि धरम सिंह मालवीय

Romance

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कवि धरम सिंह मालवीय

Romance

बहुत याद आता है

बहुत याद आता है

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वो तेरा हँसना हँसाना

हँसा कर रुलाना बहुत

याद आता है

वो तेरा शर्माना शर्मा के

पलके झुकाना

बहुत याद आता है


वो सिर को झुकाना

पल्लू में ऊँगली फिराना

मुझ को सताता है

बहुत याद आता है

बहुत याद आता है


वो तेरा दिल लगाना

वो मुझ को सताना

बहुत याद आता है

वो तेरा याद आना

याद आके रुलाना 

बहुत याद आता है


वो मेरी जिंदगी में आना

आके चले जाना

बहुत याद आता है

वो बाहों में सुलाना

सुलाकर जगाना

बहुत याद आता है

वो दर्द ए सर का बहाना

वो तेरा सिर दबाना 

वो सिर दबाकर सहलाना

बहुत याद आता है

बहुत याद आता है


वो तेरा खाना पकाना

वो मुझको खिलाना 

वो खिलाते हुए

मुझे तेरा पँखा झलाना

वो हाथ धुलाना तेरे

पल्ले से पोछाना

मुझको सताता है

बहुत याद आता है

बहुत याद आता है


वो तेरे गाँव जाना वो

सड़कें बताना 

वो मुझको तेरी

सखियों से मिलाना 

वो मेरे बारे में अपनी

साखियों को बताना

मेरे बारे में बता कर

सबसे नजरें चुराना

मुझ को सताता है

बहुत याद आता है  


वो तेरा तोहफ़ा लाना

वो सबको दिखाना 

सबको दिखाना लेकिन

मुझसे छुपाना

वो रात होते ही तेरा

मेरे कमरे मे आना 

पास आकर मेरे धीरे से

हाथ मेरा उठाना

वो ऊँगली पड़कर

आगूड़ी पहनाना

पहनकर आगूड़ी हाथ मेरा

होठों से लगाना 

मुझको सताता है

बहुत याद आता है

बहुत याद आता है


वो तेरा बिछड़ना

वो दिल का धड़कना 

वो तेरा सिसकना

रोते रोते तेरा फ़फकना

बोलते बोलते

तेरे लबों का अटकना

वो मेरा हाथ पकड़ना

और तेरा झटकना

मुझको सताता है

बहुत याद आता है

बहुत याद आता है



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