बहुत अम्मा तू आती याद
बहुत अम्मा तू आती याद
यहाँ है धूप, नहीं है छाँव ,
बहुत सूना है मन का गाँव..
स्वयं से होता जब सम्वाद ,
बहुत अम्मा तू आती याद.....।।
नहीं बनते जब सुखमय छंद ,
दुखों से छिड़ता अंतर्द्वंद ।
न जीवन में जब आता स्वाद,
बहुत अम्मा तू आती याद ...।।
करवटें लेते कटती रात ,
नहीं अपनों से होती बात ।
यहाँ जब चैन बने अपवाद..
बहुत अम्मा तू आती याद ....।।
रात जब सोता भूखे पेट,
थकन करती रहती आखेट ।
छिड़े जब अँधियारे से वाद..
बहुत अम्मा तू आती याद..।।
नहीं बनती जब रोटी गोल,
समझ आता ममता का मोल ।
करे जब अन्तर्मन अनुनाद
बहुत अम्मा..तू आती याद....।
बहुत अम्मा...............।।
