STORYMIRROR

राहुल द्विवेदी 'स्मित'

Tragedy

4  

राहुल द्विवेदी 'स्मित'

Tragedy

बहुत अम्मा तू आती याद

बहुत अम्मा तू आती याद

1 min
389


यहाँ है धूप, नहीं है छाँव ,

बहुत सूना है मन का गाँव..

स्वयं से होता जब सम्वाद ,

बहुत अम्मा तू आती याद.....।।


नहीं बनते जब सुखमय छंद ,

दुखों से छिड़ता अंतर्द्वंद ।

न जीवन में जब आता स्वाद,

बहुत अम्मा तू आती याद ...।।


करवटें लेते कटती रात ,

नहीं अपनों से होती बात ।

यहाँ जब चैन बने अपवाद..

बहुत अम्मा तू आती याद ....।।


रात जब सोता भूखे पेट,

थकन करती रहती आखेट ।

छिड़े जब अँधियारे से वाद..

बहुत अम्मा तू आती याद..।।


नहीं बनती जब रोटी गोल,

समझ आता ममता का मोल ।

करे जब अन्तर्मन अनुनाद

बहुत अम्मा..तू आती याद....।

बहुत अम्मा...............।।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy