STORYMIRROR

Rohit Sharma (Joker)

Tragedy

4  

Rohit Sharma (Joker)

Tragedy

भ्रूण...

भ्रूण...

1 min
345

मैला सा एक थैला,

छोङ गई एक नार।

कुत्तों की खींचातानी का,

न सह सका वह भार।

फटा और फटने के साथ ही,

थम गई साँसे नवजात की।

दो काग तरुवर से देखे,

व्यंग्य में शब्द बाण वे फेंके,

पढ़ा लिखा अनपढ़ है मानव।

बुद्धि से देव पर कर्म से दानव,

जो दुत्कारा जाए वर्ण से।

मीठी न हो जिसकी वाणी

उसकी भी सोच हो सकती है दूर की,

यह जग क्या जाने अभिमानी।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy