STORYMIRROR

Deepa Vankudre

Romance Tragedy

4  

Deepa Vankudre

Romance Tragedy

भी देख ली

भी देख ली

1 min
412

मेहरबानियों से खूब वाकिफ थे

आज रुसवाईयां भी देख ली

इनायतों की बारिश में भीगे थे कभी 

आज नाराजगियों की नुमाइश भी देख ली


बदले में कुछ न चाहने की चाह थी

आज बेमुराद हसरतें भी देख ली 

एक आह क्या उठी दिल से

आज मुहब्बत की हदें भी देख ली।

 

रंजिशों का नामोनिशान न था

आज शिकायतों की रफ्तार भी देख ली 

वादों की डोलियां ऊठी थी कभी 

आज उनके जनाजों की कतार भी देख ली।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance