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Ratna Kaul Bhardwaj

Romance

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Ratna Kaul Bhardwaj

Romance

भीगी फिजाएं

भीगी फिजाएं

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भीगी हुई फ़िज़ाओं में जब तेरा ख़याल आया

बरखा की हर बूंद ने बस तेरा ही नाम गाया


शाख़-ए-दिल पर बारिश का जब रक्स शुरू हुआ

लब खामोश थे, पर तेरी आँखों ने सब बयान किया


उस शाम सावन भी तुझ पर ही मेहरबान था

बादल ने भी झुक कर तेरी दहलीज को सजाया


मैंने कहा इश्क़ का मामला है बारिश ठहर जा

वह भी मुस्कुरा उठी, समां रूह में समाया


अब भी दिल बरसती रातों में सज्दे में रहता है

वह भीगा इक़रार जीने का फ़न सिखा गया....

✍️ रतना कौल भारद्वाज


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