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Ratna Kaul Bhardwaj

Inspirational

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Ratna Kaul Bhardwaj

Inspirational

एक पुकार

एक पुकार

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गुंडों का यहां राज है

अंहम उनका ताज है

अवाक देश की प्रजा है

जाने कैसी सज़ा है


मज़हब एक मोहरा है

व्यक्तित्व नेताओं का दोहरा है

चेहरों पर नकाब चढ़े हैं

जमीन तले मज़लूम गढ़े हैं


जाति, ज़ुबान की लड़ाई है

जो नेताओं ने फैलाई है

जाने कैसे यह चरित्र हैं

खून बहा के भी पवित्र है


धर्म के अंधेपन की आड़ में

बहे जा रहें नफरत की बाढ़ में

इंसान क्यों होश खो बैठा

पांव जालिमों के धो बैठा


हालातों में बदलाव लाना होगा

दमन को अब रोकना होगा

तेज़ करो कलम की धारों को

उखाड़ो सब झूठे पहरेदारों को


छोड़ के मजहब जाति की लड़ाई

कोई जात नहीं हैं यहां पराई

आपस के एहसासों में रम जाओ

एक गीत इंसानियत का गाओ


फिर देखो इन बगुले ठेकेदारों की

राख भी तड़पेगी इनकी चिताओं की

रुत और हवाएं अपने साथ होंगी

फिर भाईचारे की बरसातें होंगी


✍️ रतना कौल भारद्वाज


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