STORYMIRROR

दिनेश कुमार कीर

Romance Others

4  

दिनेश कुमार कीर

Romance Others

विश्वास की डोर

विश्वास की डोर

1 min
15

विश्वास की पक्की डोर 

जिसे हम प्रेम समझने की भूल कर बैठे थे 

दरसल वो तो किसी और के लिए महज 

वक्त गुजारने का जरिया भर था

क्यों सही कहा ना ? 

वक्त ही तो गुजारना था ना तुम्हें 

और कमबख्त मैं पागल, झल्ली  

तुम पर यकीं कर बैठी 

अपने विश्वास की पक्की डोर 

तुमसे जोड़ बैठी, 

तुम पर अंधभक्त की तरह विश्वास 

मेरे जीवन की सबसे बड़ी भूल थी 

जिसकी क्षति मैं जीवन भर 

पूर्ण नहीं कर पाऊंगी, तुमने सिर्फ 

मेरे हृदय को ही नहीं बल्कि 

मेरे आत्मसम्मान को भी 

गहरी चोट पहुंचाई है 

जानते हो तुम ! तुम्हारे बाद 

तुम पर क्या मैं कभी किसी 

पर भी भरोसा नहीं कर पाऊंगी

विश्वास की पक्की डोर कभी 

किसी से ना जोड़ पाऊंगी....



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance