युवा, तू खुद जाग जा
युवा, तू खुद जाग जा
युवा, तू खुद जाग जा
तुझमें हिम्मत है लोहे जैसी
जब तान उठेगी तेरी मुठ्ठी
कांपेगे सत्ता के अन्यायी
आँख मिला तूं तूफानों से
ललकार ज़रा बिजलियों को
जो भी पर्वत राह में अड़ जाए
उखाड़ ज़रा उन पर्वतों को
मत माँग किसी से रौशनी
सूरज बन खुद आग जला
जिस मिट्टी ने तुझको सींचा है
उस मिट्टी का कर्ज़ चुका
जब तब सोया रहा नौजवान
तब-तब बिकता रहा वतन
जब-तब जागी उसकी नसें
झुक गए क्रूरता भरे सिंहासन
तू उठे तो युग करवट ले
तू रुके तो इतिहास रुकेगा
तेरे साहस की एक दहाड़ से
झूठ, अहं से भरा सर झुकेगा
रख हाथों में श्रम,आँखों में स्वप्न
और सीने में रख ज्वालामुखी
अन्यायों की हर दीवार पर
तेरे साहस की मुहर लगेगी
तलवारों से लड़ना क्या
विचारों की धाराएं बहानी है
हर सोई हुई अंतरात्मा में
क्रांति की लौ जलानी है
युवा, तुझे जागना पड़ेगा
हिम्मत है तुझमें लोहे जैसी
तेरे कदमों की गूँज से ही
बदलेगी तक़दीर देश की
उठ! कि समय पुकार रहा है
उठ! कि भविष्य निहार रहा है
उठ! कि तेरे उठने की देर है
यह तिरंगा तुझे पुकार रहा है
पर देखो बच्चों, भाइयों,
बहनों और मेरी बेटियां,
तुम्हें दंगाई नहीं बनना है
छूनी है शिक्षा की चोटियाँ
तुम बात करो संवादों की
और राह चुनो बस अहिंसा की,
तुम्हें क्रोध नहीं,विवेक जगाना है
यही जीत होगी मानवता की
गर सचमुच शिक्षित होना है
तो प्रश्न व्यवस्था से करना होगा,
जो गलत लगे तो निर्भय होकर
उसको बदलने का स्वप्न बुनना होगा
शिक्षित होगें जब नवजवान
भारत का सम्मान बढ़ेगा,
जब ज्ञान की मशाल जलेगी
इतिहास नया तभी गढ़ेगा
क्यों अपना घर छोड़े युवा
वो परदेसों में भटके क्यों
गर अवसर मिले अपने घर
तो सूली पर वो लटके क्यों
संघर्ष करो अवसर पाने को
नफ़रत का साथ कभी न देना
हमें देश बदलना है मिलकर
देश को पीछे नहीं ले जाना
कलम उठाओ, प्रश्न पूछो
पर पत्थर हाथों में मत लाना,
हक़ की ख़ातिर डटकर लड़ना
देश को अपने मत जलाना
शिक्षा, श्रम और सत्य की राहें
बदलेंगी अपने हिंदुस्तान को
ऐसा भारत हमें बनाना है
जिस पर
हर पीढ़ी को अभिमान हो
युवा, तू खुद जाग जा!
युवा, तू खुद जाग जा!!
युवा तू जाग जा!!!
युवा तू खुद जाग जा!!!!
✍️ रतना कौल भारद्वाज
