भारत की संस्कृति बचाना है
भारत की संस्कृति बचाना है
उठो विद्वानों जागो अब भारत की लाज बचाना है,
पतन में जा रही संस्कृति हमारी,
उठो विद्वानों हमको मिलकर इसे बचाना है|
हमारी सभ्यता सबसे पुरानी हमें इसे बचाना है
बहुत बिगड़ा बिगड़ने वालों ने,इस संस्कृति और सभ्यता को हमको ही बचाना है,
इन असभ्य लोगों को हमको लगाम लगाना है|
स्वामी विवेकानंद की यह भूमि महावीर स्वामी और गौतम बुद्ध,
बौद्ध के विचारों को अपनाना है
उठो विद्वानों जागो,अब भारत की संस्कृति बचाना है |
आज की युवाओं को अपनी संस्कृति का पाठ पढ़ना है, उठो विद्वानों, शिक्षक उठो अब आपको ही ज्ञान से अपनी सभ्यता संस्कृति बचाना है|
माँ सीता,मां सावित्री,झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की यह भूमि,
अपशब्दों के प्रयोग को लगाम लगाना है स्त्रियों की मर्यादा अब इनको हमें ही सीखना है,
उठो विद्वानों, शिक्षक उठो, अब संस्कृति और संस्कार की पहचान सबको सीखना है|
आर्यभट्ट,भास्कराचार्य,रामानुजन,चरक की यह भूमि,
यह विश्व गुरु कहलाता था,
आज के भारत को हमको ही जागना है,
फिर से इन गुरुओं के जैसा आज के युवाओं को आगे बढ़ने का मार्ग बताना है |
युग परिवर्तन और समय की मांग को हमको आज के युवाओं को सिखलाना है,
हमारी संस्कृति,हमारी धरोहर इस धरोहर को हमको बचाना है
उठो शिक्षकों जागो अब हमको इनको कहानी के माध्यम से संस्कृति क़ो कहकर सुनना है |
भारत की शिक्षा,भारत का गौरव हमको ही वापस लाना है,
धर्म की शिक्षा,कर्म का मूल्य,नैतिकता का पाठ हमको ही बतलाना है,
उठो विद्वानों शिक्षक उठो भारत की रूपरेखा ज्ञान से सजाना है,
उठो विद्वानों शिक्षक उठो अब समझ में मिलकर सभ्य समाज बनाना है |
वर्तमान में आंदोलन में अनुचित शब्दों और व्यवहारों को जो शीर्ष नेता के साथ अनुचित व्यवहार हुआ,
वह अनुचित था,
गरिमा में भाषा ही बने युवा पीढ़ी की पहचान अपशब्द नहीं भारत का मान ना भारत की पहचान देश विरोधी ताकत थे यह नहीं भारत की पहचान,
यह हमारा संस्कार नहीं,यह हमारा और हमारे देश का अपमान,
उठो विद्वानों शिक्षक,उठो भारत मां की तुम ही पहचान|
रणचंडी बन लड़ी लक्ष्मी बाई हमारे देश की पहचान है, अंतिम सांस तक हार न मानी वह लक्ष्मी बाई महान है,
देश हमारा संस्कृति हमारी, यही विश्व में हमारी पहचान है,
उठो विद्वानों शिक्षक जागो भारत की संस्कृति और संस्कार ही विश्व में हमारी पहचान ||
