Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer
Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer

Amit Kumar

Inspirational

3  

Amit Kumar

Inspirational

भाग चलते है...

भाग चलते है...

1 min
240


आओ भाग चलते है

इस शोर गुल से कहीं दूर

दूर बहुत दूर कहीं वीराने में

या उन पहाड़ों पर जहाँ

क्रंदन होता है शांत मधुर संगीत का

जहाँ वादियाँ अभिवादन करती है

गिरते हुए बहते हुए झरनों का

दिल खोलकर रख देती है

जहाँ शिला चट्टानें अपने अधीर

मन का


वहीं यह बहाव अपना आलिंगन

प्राप्त करता है

वो जो ग्रस्त हो चुके है समाज की

विकृत मानसिकता

और मानवीय जीवन मूल्यों से

वो जो कहो चुके है आत्मसंबल

अपने धैर्य का

उन्हें ही तो बुलाते है पुकारते है

यह नदी नाले पेड़ झरने वादियाँ

कि लौट आओ हमारे पास और

समर्पित कर दो

स्वयं को निस्वार्थ भाव से हमें

हम तुम्हें समेट लेंगे अपने में

और हर लेंगे तुम्हारा हर कष्ट

हर पीड़ा...



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational