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Madhu Vashishta

Action Inspirational

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Madhu Vashishta

Action Inspirational

बेटों की मां।

बेटों की मां।

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बेकल रहती है बेटों की माँएं

वंश बेल तो बढ़ गई लेकिन

अपने जैसी किसी कृति का निर्माण हुआ कहां?


मन में उमड़ती घुमड़ती हजारों बातों का समाधान हुआ कहां?


मन के भीतर वाली अनकही बातें

अधूरे सपने, अनमोल एहसास,


उमड़ते जज्बातों की भाषा,

नारी मन की विषम वेदना


बिना बेटी के समझेगा कौन?


अपना रूप जो लेकर आए।

जिसके साथ अपना बचपन जी जाएं।


जो अधूरापन रह गया था खुद में,

बिन बेटी के पूरा करेगा कौन?


बेकल रहती है बेटों की माँएं ,

अपनी मां के दुनिया से जाने के बाद,

मां की कमी पूरी करेगा कौन?


मन की बात किससे बतलाएं?

अपने सपनों को कैसे समझाएं?

हृदय के अंतर तल तक जा के?

अब मनोभावों को समझेगा कौन?


वंश बेल तो बढ़ जाएगी

लेकिन मन की मन में ही रह जाएगी।

काश अगर जो बेटी होती।

मन से मन की कड़ी वह होती।


मन की हर वेदना को समझने वाली।

पराई होकर भी मन के एक हिस्से में रहने वाली।

काश अगर जो बेटी होती,

प्रत्येक अधूरे सपने को पूरे वह करती।


इसीलिए तो बेटों की मां है तरसती।

एक बेटी की आस वह करती है।

कभी नहीं वह बेकल होती,

अपने मन को बेटी के सामने खोल देती।



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