STORYMIRROR

Jyoti Sagar Sana

Classics Crime Inspirational

4  

Jyoti Sagar Sana

Classics Crime Inspirational

बेटी बचाओ

बेटी बचाओ

1 min
588

मन के दरवाजे पर दस्तक हुई है,

लग रहा है भीतर तक गयी है।


किसी ने पुकारा है इस कदर,

कि आवाज़ हलक तक गई है।


दस्तक बदल गई धड़कन में,

अब रगों का लहू बन गयी है।


किसी की बेटी अखबारों में,

जलती रही हर रोज़,


दर्द बर्दाश्त के बाहर हुआ,

जब खुद की राख बन गयी है।


इस दस्तक से ही निकलेंगी,

अब और भी सदायें,


आओ दोस्तों बेटियों को,

बचाने के लिये कदम उठाएं।


రచనకు రేటింగ్ ఇవ్వండి
లాగిన్

Similar hindi poem from Classics