बेरुखी
बेरुखी
तेरी बेरुख़ी का असर कुछ यूँ हुआ,
भीड़ में रहकर भी दिल तन्हा हुआ।
पहले हर बात पे मुस्कान मिलती थी,
अब हर ख़ामोशी में फ़ासला हुआ।
तेरे लहज़े की वो नरमी कहीं खो गई,
जैसे मौसम अचानक बेवफ़ा हुआ।
हमने तो चाहा था उम्रभर का साथ,
पर तेरा दिल शायद कहीं और जा हुआ।
अब शिकवा भी करें तो किससे करें,
जिसे अपना समझा वही बेगाना हुआ।
