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NOOTAN KUMARI

Abstract

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NOOTAN KUMARI

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अपनी कहानी है

अपनी कहानी है

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सबकी यही कहानी है, आँखों में क्यों पानी है? 

हँसते चेहरों के पीछे भी, छुपी हुई वीरानी है। 


किश्तों-किश्तों जीते हैं सब, साँसों की निगरानी है, 

कल की ख़ातिर आज गंवाना, कैसी ये नादानी है। 


नए घरौंदे बुनते हैं सब, चौखट वही पुरानी है, 

मंज़िल की चाहत में खोई, हर राह अनजानी है। 


चलते रहना अपनी धुन में, यही बड़ी मेहरबानी है, 

रुक जाए जो वक़्त के आगे, उसकी हार निशानी है।


ख़ुशियाँ तो मेहमान रहीं बस, ग़म की लंबी पहरेदारी है, 

दर्द सजा है हर डाली पर, पतझड़ सी ज़िंदगानी है। 


पूछो मत क्या चीज़ है दुनिया, सबकी अपनी कहानी है, कुछ भी नहीं है ज़िंदगी बस, एक अधूरी रवानी है।


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