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DRx. Rani Sah

Tragedy

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DRx. Rani Sah

Tragedy

बेरोजगारी _ नौकरी की भूख

बेरोजगारी _ नौकरी की भूख

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हर युवा यहां बेरोज़गार है, 

नौकरी की भूख सबको, 

ये भूख नहीं मिटती है, 

पढ़े लिखे बेबस लाचार हैं, 

मजबूरी हर चेहरे पर लिपटी है, 

ये बेरोज़गारी की बीमारी, 

हर तकलीफ़ से बड़ी है, 

ना कोई दवा ना कोई इलाज है, 

ना इससे निकलने की कोई कड़ी है, 

हर युवा के लिए यहाँ पर, 

नौकरी बना एक सवाल है, 

मायूसी फैली चारों ओर, 

हर तरफ नाकामी का जाल है, 

हर युवा यहां बेरोज़गार है, 

नौकरी की तड़प सब में, 

कुछ उलझे हैं उच्च निम्न स्तर में, 

डिग्री है उपलब्धि है,

फिर क्यों मिलता तिरस्कार है, 

इस बात से कहाँ किसी को इनकार हैं, 

बेशक शिक्षा की प्रगति में हो रहे

सैकड़ों विकास है, 

अर्जित कर ज्ञान फिर क्यों,

हर युवा यहाँ निराश है, 

बेरोजगारी की अंधेरे में, 

अब बस नौकरी के उजाले की तलाश हैं, 

हर युवा यहाँ मोर्चा लेकर निकल पड़ता हैं, 

वजह उदासी से घिरा उसका हँसता खेलता परिवार हैं, 

ये बेरोजगारी की समस्या अब कहाँ सुलझने वाली हैं, 

नौकरी की कमी में नाकामी की ताली हैं, 

हर युवा सब्र संयम सब खो रहा हैं, 

देखकर उन काग़ज़ के बने डिग्रियों को, 

मन ही मन रो रहा हैं, 

रख के हाथ अपने दिल पे, 

दर्द के भीषण आग में जल के, 

लड़खड़ाते लफ्जों से, 

बस दो ही शब्द कहता है, 

मेरा नौकरी करना मेरे पिता का सपना है।



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