बेलगाम इच्छाएं
बेलगाम इच्छाएं
इच्छाएं बहुत तेज भागती है,
बिल्कुल घोड़ों के समान,
एक पूरी होते ही
दूसरी सामने,
बेलगाम होती इच्छाएं,
भौतिक, भोग विलास,
में रमकर
जीवन के यथार्थ,
और उद्देश्य परक
जीवन भूलकर,
मानव जीवन
प्रेरणा रहित कदम चुनकर
सिर्फ पछतावे की
शाम पर ढलते है,
दौड़ती भागती
तिमिर की अंधयारी,
गलियों से होकर इच्छाओं के,
बेलगाम घोड़े,
फिर आगे बढ़ते हैं,
सुख और दुःख में,
ईश को याद कर,
समभाव रख ,
मन शांति को प्राप्त होगा,
लगाम रखकर संतुलित जीवन,
और यथार्थ की दूर दृष्टि,
अतृप्त इच्छाओं की लगाम।
