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Pratibha Bhatt

Others

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Pratibha Bhatt

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यादें

यादें

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यादें भी कितनी

अजीब होती हैं

कोई वक्त नहीं

इनके आने का

चली आती है

हर दिशा से

बिना कोई

 इजाज़त के

खुशी में, गम में

मुश्किलों के

हर मौसम में

हर याद का

अपना एक रंग है 

अकेले में भी

भीड़ का हिस्सा भी

लिखना है बहुत कुछ

कुछ छूट जाता है

कुछ अमिट

स्याही बन जाता है

अधूरा ख़्वाब भी

एक दिन पूरा होता

है यादों में कहीं.........



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