Neer N
Fantasy Others
बेख्याली में यूं ही ख्याल आया,
ख्याल को लिखने बैठी
तो ये ख्याल आया!
और भी लोग हैं
मेरी जिंदगी में अहम!
फिर दिल को,
तेरा ही क्यों,
खयाल आया!!
मां....
दवा
नीर
दोस्त....
तुम मुझे पढ़ ...
मुझे पसंद नही...
खूबसूरत
तुम्हारे खत.....
बेख्याली का ख...
ये दुनियां ही बनी है इश्क़ के बाबत मेरी जाना, जुदाई क्यों हुई यह क़िस्सा पहचाना नहीं ये दुनियां ही बनी है इश्क़ के बाबत मेरी जाना, जुदाई क्यों हुई यह क़िस्सा पहच...
क्यों इनके रंगीन सपनों में अपनी हक़ीक़त को भूला देना...?? क्यों इनके रंगीन सपनों में अपनी हक़ीक़त को भूला देना...??
इश्क कोई व्यापार नहीं जो लेन देन करे जो लेन देन करते हैं वो इश्क नहीं करते। इश्क कोई व्यापार नहीं जो लेन देन करे जो लेन देन करते हैं वो इश्क नहीं करते।
जीवन को महोत्सव में बदल देती है। इसलिए माँ से जीवन का महोत्सव है। जीवन को महोत्सव में बदल देती है। इसलिए माँ से जीवन का महोत्सव है।
जरा जरा सी बात पर, कुछ जन करते क्रोध। होते खुशियों से जलन, सुनें नहीं अनुरोध।। जरा जरा सी बात पर, कुछ जन करते क्रोध। होते खुशियों से जलन, सुनें नहीं अनुरोध।...
वफा का खिताब बने छिपाए एक सूखा गुलाब समंदर रूपी एक किताब।। वफा का खिताब बने छिपाए एक सूखा गुलाब समंदर रूपी एक किताब।।
चित्रों में आत्मा डाल उनकी बात का मर्म समझाता है । चित्रों में आत्मा डाल उनकी बात का मर्म समझाता है ।
पुकार रहा हूं कबसे तुमको आओ चलो चलें हम मित्र देखे आज नया चल चित्र।। पुकार रहा हूं कबसे तुमको आओ चलो चलें हम मित्र देखे आज नया चल चित्र।।
मगन हो पूरी शिद्दत से उसे फिर से बुलाते हैं।। मगन हो पूरी शिद्दत से उसे फिर से बुलाते हैं।।
विरह की पीड़ा असहनीय अंत में सुखद मिलाप विरह की पीड़ा असहनीय अंत में सुखद मिलाप
साहित्य इंसान की, आत्मा होती। साहित्य इंसान की, आत्मा होती।
पुराने क़िले के खंडहरों के बीच इतिहास का साक्षी वो कमरा। पुराने क़िले के खंडहरों के बीच इतिहास का साक्षी वो कमरा।
पहले जैसी मज़ा नहीं होती है फिल्म में बस ट्रेलर देखकर बंद करते हैं फिल्म। पहले जैसी मज़ा नहीं होती है फिल्म में बस ट्रेलर देखकर बंद करते हैं फिल्म।
पशु पूजा भी आज है, जीवन में है साथ। बांध नया दृढ़ डोर से, रहे अनुराग हाथ।। पशु पूजा भी आज है, जीवन में है साथ। बांध नया दृढ़ डोर से, रहे अनुराग हाथ।।
भक्त तुझे पूजते, सवाल एक ही पूछते। भक्त तुझे पूजते, सवाल एक ही पूछते।
कहने को तो हर शख्स गुमनाम है मेरी तो आवाज़ ही मेरी पहचान है।। कहने को तो हर शख्स गुमनाम है मेरी तो आवाज़ ही मेरी पहचान है।।
एक मास में दो ग्रहण, कैसा यह है रंग। फिर भी खुश हम सब रहें, बाधा को कर भंग।। एक मास में दो ग्रहण, कैसा यह है रंग। फिर भी खुश हम सब रहें, बाधा को कर भंग।।
मुसीबत में हमारा साथ कभी न ये छोड़ता है, इसलिए तो किताबें हमारी दोस्त बनती है। मुसीबत में हमारा साथ कभी न ये छोड़ता है, इसलिए तो किताबें हमारी दोस्त बनती है...
खट्टे-मीठे अनुभव से मिलकर.... ये रहस्यमयी सफ़र तय हो जाए। खट्टे-मीठे अनुभव से मिलकर.... ये रहस्यमयी सफ़र तय हो जाए।
हो जगमग दीपावली हर किसी की ऐसा वरदान मिले ईश्वर अवतारों से। हो जगमग दीपावली हर किसी की ऐसा वरदान मिले ईश्वर अवतारों से।