STORYMIRROR

Neer N

Abstract Fantasy Others

2  

Neer N

Abstract Fantasy Others

नीर

नीर

1 min
82

किसी किताब की कहानी की तरह 

बहती हूं अपनी रौ में पानी की तरह,

बन कर लफ्ज़ लफ्ज़ 

बिखरा पड़ा है वजूद मेरा। 

तुम रख तो समेट कर 

किसी निशानी की तरह। 

किसी किताब की कहानी की तरह।

बहती हूं अपनी रौ में पानी की तरह!!


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract