बेइंतहा प्यार
बेइंतहा प्यार
प्यार मुझे
हर किसी से बेइंतहा है
यह सौ प्रतिशत सच है
इसमें कोई संदेह नहीं
शुबह नहीं
मुझे यह कहते कोई संकोच नहीं
बल्कि खुशी है कि
मेरे दिल में सबके प्रति कितना प्यार है
आदर है, मान सम्मान है
मेरा दिल है एक प्यार का सागर लेकिन
कोई इसे समझे तो
स्वीकारे तो
बेइंतहा प्यार
इसे छोड़ो
मुझसे किसी को थोड़ा सा तो प्यार हो
बेइंतहा प्यार एक तरफा हो तो फिर
प्यार का कोई अर्थ नहीं रहता
अपने दिल में प्यार लिये लिये
एक आवारा बादल की तरह
फिरते रहो
इसकी विशालता का किसी को कोई
गुमान नहीं होता
इसका न कोई दायरा
न ही कोई ओर छोर होता।

