STORYMIRROR

बेज़ुबानशायर 143

Abstract Fantasy Inspirational

4  

बेज़ुबानशायर 143

Abstract Fantasy Inspirational

बेहतर बनाएं ये वर्ष

बेहतर बनाएं ये वर्ष

1 min
257

क्या भईया बीत गया साल

हंसते गाते मुस्कुराते 

चला गया अपनी चाल

ले गया अपने संग किस्से और यादें पुरानी


छोड़ वही पुराने रूप रंग

बेरोज़गारी, आबादी 

बदलेगा नहीं कभी ये ढंग

कौन‌ लेगा इसकी जवाबदारी


भूल कर सब मना रहे 

नये साल का जश्न

मौज मस्ती खूब कर रहे

सारी समस्याओं को कर भग्न


दीवार से उतर‌ गया है 

पुराना, रंगहीन 2023 का कैलेंडर

और‌ उसी जगह टांग दिया गया

नया रंगीन 2024 का कैलेंडर


देखो भईया इस साल की नई सूरत

चमचमा रही बाहर से

अन्दर से हो चुकी पुरानी ‌मूरत

 आओ बनाएं बेहतर आज को।         ‌ 


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract