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Sriram Mishra

Romance

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Sriram Mishra

Romance

बेबस मोहब्बत

बेबस मोहब्बत

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 कहीं खो गयी वो यादें जब

मेरा दिल भी धड़कता था 

वो मुझे देखती रहती थी

मैं उसे देखता रहता था

बेपनाह मोहब्बत थी उससे

दिल था मेरा बेगाना


दिल सोच रहा था कह दूँ उसको

पर हिम्मत कभी न होती थी

पर वो क्यों खामोश रही

दिल मेरा यही सोचता था


कोई तीसरा भी था जीवन में मेरे  

बस यही सोच रूक जाता था

क्या तेरा हाल भी ऐसा था

क्या तेरा हाल भी ऐसा था


वो आखिरी दिन था काॅलेज का

दिल बेचैन बहुत ही ज्यादा था

दिल कहा बहुत कुछ कह दूंगा

 और लिपट कर तुझसे

जी भर के आज मैं रो लूंगा 

पर भीड़ बहुत ही ज्यादा था

पर भीड़ बहुत ही ज्यादा था


मैंने देखा था तेरे आँखों को

आँखें तेरी भर आयी थी

खामोश निगाहें कहती थी

मुझ जैसे बुझदिल से तुझको

 प्यार बहुत ही ज्यादा था

प्यार बहुत ही ज्यादा था


फिर कहीं खो गयी भीड़ में तू 

रह गया भीड़ में मैं तन्हा 

रह गई मेरी तन्हाई थी

बस रह गई मेरी तन्हाई थी।


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