बच्चे
बच्चे
लगी हुई है हाट मंगल की , जहाँ पर बिकते हाथी घोड़े।
मोल भाव सब करें कह रहे, कर लो कुछ कम पैसे थोड़े।।
कोई राजा, कोई व्यापारी, कोई है शौकीन दौड़ खिलाड़ी।
आये हैं नर-नारी देखने शहर, गाँव से पैदल ही दौड़े दौड़े।।
बच्चों में उत्साह अपार है, मांग रहे मनपंसद सामान, वस्तुएं।
कुल्फी, चुस्की, शर्बत, लस्सी, गर्म जलेबी, लड्डू, मूंग मंगौड़े।।
तम्बू और कनात लगा कर , उत्सव का आयोजन हो जैसे।
चटख रंग परिधान पहन कर, जुटे नारि-नर, मौड़ी-मौड़े।।
आवाजाही लगी हर तरफ, कंधे पर बैठे कुछ बालक।
उंगली पकड़े चले जा रहे, बच्चे 'मीरा' संग गुब्बारे फोड़े।।
