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Vijay Kumar parashar "साखी"

Tragedy Inspirational

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Vijay Kumar parashar "साखी"

Tragedy Inspirational

बालाजी अपना,बाकी जग झूठा सपना

बालाजी अपना,बाकी जग झूठा सपना

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कौन इस दुनिया मे अपना है

यह जगत बस झूठा सपना है

सच्चाई आईना देख,मुसाफिर

आज रोशनी में तम कितना है


जिस रिश्ते में लगाव जितना है

वो रिश्ता जख्म देता उतना है

रिश्तो में आज अहम इतना है

मनु,मनु को समझे कमीना है


कौन इस दुनिया मे अपना है

यह जगत बस झूठा सपना है

जिस पर करते भरोसा घना है

उससे टूटे पत्थर घट अपना है


वो ही धोखा देता,यहां गहना है

जिस पर अटूट भरोसाअपना है

लहूं से ज्यादा स्वार्थ बहता है,

खून के रिश्तों में हुआ,दमा है


कोई न महकमा आज बचा है

हर ओर स्वार्थ का डंका बजा है

क्या भाई,क्या माता-पिता,बहन

क्या मित्र,क्या पत्नी सबने ठगा है


तेरे नाम से बाला सुकूं मिला है

सच की बूंदे ज़रा नही ठहरती है

हर रिश्ता यहां चिकना घड़ा है

बस तेरा रिश्ता बालाजी सच्चा है


बाकी यहां पर हर धागा कच्चा है

बालाजी सदा श्री चरणों मे रखना,

तेरे सिवा बाला कोई न अपना है

यह जगत तो बस झूठा सपना है


उल्टे दरख़्त जैसा यह जग बना है

उल्टा देखो,दिखेगा सीधा तना है

हम बंदर,तू मदारी चाहे जैसे नचा

हनुमानजी तू ही स्वामी अपना है


तेरी भक्ति में मजा बाला इतना है

स्वर्ग भी लगता एक झुनझुना है

तुझे पाना बाला मकसद अपना है

बाकी तो यह जगत अंधा कुंआ है


हर रिश्ता मतलब वास्ते बना है

बालाजी एकमात्र तू ही सगा है

बाकी हर रिश्तेदार स्वार्थी घना है

बाला तुझे पाना आखरी तमन्ना है


जग जाये भाड़ में,तू है,साथ मे

फिर क्या गम है,किसी बात में

तू मेरा प्रभु,में तेरा दास अदना है

बाकी जग से मुझे क्या करना है


सिर्फ बालाजी यहां अपना है

बाकी सारा जग झूठा सपना है।



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