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Satyam Tripathi

Tragedy

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Satyam Tripathi

Tragedy

आओ कृष्ण

आओ कृष्ण

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दुःशासनो की भीड़ में

चीखती पांचाली अब हर घड़ी

हर नारी है खड़ी

आज बन कर द्रौपदी

चीर खींचते, कर चहुओर है

इस स्थिति में न जाने कृष्ण किस ओर है

क्षत विक्षत सब संस्कार है

ऐसी खबरों का भी हो रहा व्यापार है

कानून पर भी अब न बचा ऐतबार है

हर तरफ उग चुकी ये खरपतवार है

आओ कृष्ण सीधी करो इन हैवानों की मति

अब हो गई है अति, अब हो गई है अति।



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