STORYMIRROR

Satyam Tripathi

Abstract

4  

Satyam Tripathi

Abstract

चुनाव जब आयेंगे

चुनाव जब आयेंगे

1 min
22

जिनके खुद के घर शीश महल हो,

वो भी अब दूजे घर पत्थर मारेंगे।

गौर करेंगे सबकी कमियाँ,

अपने सारे ऐब छिपाएंगे।

नेताजी आकार भाषण खूब सुनाएंगे,

ये होगा, वो होगा, वादे हजार गिनाएंगे।

कट्टर शत्रु मित्र बनेंगे,

कुछ अपने भी अलग रंग दिखाएंगे।

हर रोज बनेंगे नव समीकरण,

जाति धर्म और भाषा के दम पर बैर बढ़ाएंगे।

लोकतंत्र का जब उत्सव होगा,

उस की ही पहली बलि चढ़ाएंगे।

भारत में चुनाव जब आयेंगे,

तब घर घर रुपए और कपड़े बांटे जाएंगे।


ಈ ವಿಷಯವನ್ನು ರೇಟ್ ಮಾಡಿ
ಲಾಗ್ ಇನ್ ಮಾಡಿ

Similar hindi poem from Abstract