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Bhawna Kukreti Pandey

Tragedy

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Bhawna Kukreti Pandey

Tragedy

औरत

औरत

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 21वीं सदी में 

कई लोग औरतों के 

आगे बढ़ने को लेकर

जोर शोर से चन्द औरतों की 

आवाज से आवाज मिलाते

नारे लगाते हुए

साथ चलते नजर आते है।


लेकिन जब 

उनका धर्म डरने लगता है 

औरतों की आज़ाद आवाजों से

तब जानते है 

कहाँ खो जाते हैं नारे

उन लोगों के?


वे शोर की शक्ल में

नक्कारखाने में बजने लगता है

ये ऐलान करता है कि

हर औरत का 

एक धर्म भी होता है।


वही नीच शोर 

यह भी फुफकारता है कि

एक औरत को भोगने के लिए,

किसी भी औरत का 

कभी कोई धर्म नहीं होता।


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