औरत
औरत
21वीं सदी में
कई लोग औरतों के
आगे बढ़ने को लेकर
जोर शोर से चन्द औरतों की
आवाज से आवाज मिलाते
नारे लगाते हुए
साथ चलते नजर आते है।
लेकिन जब
उनका धर्म डरने लगता है
औरतों की आज़ाद आवाजों से
तब जानते है
कहाँ खो जाते हैं नारे
उन लोगों के?
वे शोर की शक्ल में
नक्कारखाने में बजने लगता है
ये ऐलान करता है कि
हर औरत का
एक धर्म भी होता है।
वही नीच शोर
यह भी फुफकारता है कि
एक औरत को भोगने के लिए,
किसी भी औरत का
कभी कोई धर्म नहीं होता।
