अपने अश्क़ से इश्क हम करते हैं
अपने अश्क़ से इश्क हम करते हैं
जब गीली हों आँखें तो,
पलकें उन्हें ढँककर छुपा लेती हैं!
ये पलकें ही तो अपनी,
बरौनियों का सुन्दर घेरा बनाती हैं!
जिसके तले महफूज रहती हैं,
हमारी आँखें और दुनिया देखती हैं!
इन रेशमी पलकों पर तो,
तमाम ग़ज़लें, शायरियां लिखी जाती हैं!
इन गहरे पलकों में छुपकर,
महबूब के सलोने सुंदर अक्स रहते हैं!
एक बार नहीं जानम बल्कि,
सौ बार अपने अश्क़ से इश्क हम करते हैं!

