अनमोल तोहफा
अनमोल तोहफा
प्रिये, मैं तुम्हें आज दूंगी
सबसे अनमोल तोहफा
जो नहीं बिकता बाजारों में
ऊंचे ऊंचे दामों में
तरसकर जिस प्रेम के लिए
अवतार लेते हैं देवी और देवता
हाँ, प्रकृति प्रदत्त तुम्हारे लिए ही सम्भाला
तुम्हारे लिए ही पाला
आज वसंत की बेला में
मैं तुम्हें सौंपूंगी, अपना पूर्णतः शुद्ध यौवन
और हमेशा के लिए अपना मन
पूरे जीवन में कुंवारी,
किसी एक को ही सौंपती है अपना सर्वस्व
तन के साथ अपने मन और प्राण भी
और बदले में कोई मोल नहीं, कोई तौल नहीं
केवल और केवल तुम्हारा मन।

