अखंड भारत
अखंड भारत
अखंड भारत की यात्रा का कर दिया हमने आगाज़,
चारों तरफ अब गूँज रही अखंड भारत की ही आवाज़,
संकल्प हमने ठानी है, संकल्पना हमने मानी है
अखंड भारत की सम्प्राप्ति हेतु ही न्यौछावर अब अपनी जवानी है
ताशकंद से मुल्तान होते हुए लाहौर से लुधियाना तक तिरंगा अब शान से फहरानी है ,
पर्वतराज हिमालय से हिंद महासागर तक अविरल गंगा बहानी है ।
हमें अखंड भारत बनानी है ।
अखंड भारत के संकल्पना को सम्प्राप्ति तक पहुंचानी है ,
हां! हमें अखंड भारत बनानी है ।।
