अजनबी
अजनबी
वो अजनबी मुझे प्यारा बहुत था
जिंदगी का वो सहारा बहुत था
गया दूर जबसे ना राहत है दिल को
मुझे दिल से वो प्यारा बहुत था
अदाये उसकी भी थी कातिलाना
पर वो मेरी आँखों का तारा बहुत था
भूल सकती नही मोहब्बत मैं उसकी
भुला भी कैसे चाहत मैं उसकी
समझता था मुझको मुझे जनता था
हर धड़कन मेरी वो पहचानता था
अचानक मिले थे हम किस्मतों से
अजनबी था वो लेकिन मेरा अपना बहुत था।
