अजनबी रिश्ते
अजनबी रिश्ते
अनजानी राह पर,जाने पहचाने से कुछ,
अजनबियों के बीच, कोईअपना पा जाने की चाहत में
राह तकती ये निगाहें .किसी के दिल में,
अपने दिल की परछाई को, टटोलती हुई ये निगाहें
किसी अजनबी के,अपना बन जाने के भ्रम को
सच समझने की भूल करती ये निगाहें.दूर -दूर तक
आस का सहारा नहीं मिलता.अनजाना रहता है
अनजानापन, अपनेपन से,तब मायूसी के सागर में,
डूब जाती हैं ये निगाहें. भटके हुए दिलऔर तरसती
निगाहों को कहीं आस का नज़ारा नहीं मिलता
जैसे नदी के एक किनारे को कभी दूसरा किनारा नहीं मिलता।
