निगाहों को कहींआस का नज़ारा नहीं मिलता जैसे नदी के एक किनारे को कभी दूसरा किनारा नहीं निगाहों को कहींआस का नज़ारा नहीं मिलता जैसे नदी के एक किनारे को कभी दूसरा किनारा...