ऐसे ना जीवन हारो तुम
ऐसे ना जीवन हारो तुम
एक कविता उन बच्चों के लिए है जो घर छोड़कर बाहर जगह-जगह कोचिंग में पढ़ाई करने जाते हैं और जब अपने मुकाम में आसफल होने लगते हैं तब वो कुछ बच्चे आत्महत्या जैसा जघन्य अपराध कर बैठते हैं ।
जो जाते हैं चमकाने किस्मत अपनी
फ़िर हार क्यों हालात के आगे जाते है
जीवन इतना सस्ता है क्या
कि पल में खतम कर जाते है..!!
कौन सी ऐसी कुंठा है
कि उलझ के उसमें रह जाते है
असहाय और निराशा में घिर कर
क्यों अवसाद को गले लगा लेते है..!!
जो उज्वल भविष्य के सपने लेकर
साकार करने हर्षित मन के साथ दौड़ लगाते है
वो देख भीड़ प्रतिस्पर्धा की
क्यों मन से हार वो जाते मौत के गले लगाते है...!!
माना बहुत कठिन है जीवन की राहे
क्यों उम्मीदों के पंखों को इतना कमजोर बनाते है
कि संघर्ष से घबरा कर पल में
ऐसा संगीन अपराध कर जाते है..!!
जीवन अभी खुलकर जिया भी नहीं
फिर कौन से भय से कांप जाते है
सुंदर कितनी है जीवन की घड़ियाँ
उस एहसास को घबरा और डर कर खो देते हैं...!!
क्यों हार के परिस्थितियों से ख़ुद को
पल में जीवन समाप्त कर लेने का मन बना लेते हो
जो भविष्य थे तुम कल के सुनहरे
तुमने आज ही अपना खत्म कर डालते हो ...!!
कौन सा ऐसा दलदल है समय की धारा का
जिसमें फंसकर जीवन अपना खो देते हो
या फिर कौन सी ऐसी खलवत घेर लेती है
जो अपनों से कहने की हिम्मत नहीं जुटा पाते हो..!!
देखो जीवन में रास्ते और मंजिल बहुत पड़े
बस गिद्ध सी नज़र तुम्हें दौड़ा कर रखनी है
खुलेंगे रास्ते तब कई नए और चमकेगी किस्मत भी
बस हार और अवसाद नजदीक नहीं आने देनी है...!!
आत्महत्या कोई समाधान नहीं
यह तो बुजदिली होने की राह हमारी दर्शाता है
ऐसा कभी जघन्य अपराध ना अपने साथ करो
जीवन बड़ा अनमोल है सबका इसको यूं ना बर्बाद करो...!!
