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Rajeev Rawat

Romance

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Rajeev Rawat

Romance

अगर तुम न होते--दो शब्द

अगर तुम न होते--दो शब्द

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जिंदगी

आज जब हिसाब लगाता हूं

तो अकेले गुजारे पलों की दास्ताँ

उनके साथ बिताए गये पलों के जोड़ में कहीं खो जाती है-

और मेरे दिल के कैनवास पर

उनकी कांपती हुई उंगलियों से लिखी जीवन की कहानी ही अपनी और अपनी होकरआंखो के सामने नजर आती है-

आज सोचता हूं कि

अगर तुम मेरा हाथ थाम कर न चले होते-

तुम्हारी झील से गहरी आंखों में

मेरी जिन्दगी के अहसास भरे सपने न पले होते-

राह में बिखरे कांटो पर 

यदि तुम्हारे प्यार का आंचल न फैला होता-

तो मैं जिंदगी की जद्दोजहद में

थक हार कर कहीं अनजान सा पड़ा होता-

तुम मेरे अंधेरे जीवन में

कभी महताब तो कभी आफताब बन रोशनी फैलाती रही-

जो कह न सका पुरूषत्व के दंभ में शायद

आज कहता हूं कि मेरी जिन्दगी करने को रोशन

तुम अपने आप को जलाती रही-

आज स्वीकार करता हूं

जिंदगी के वह पल, वह अहसास, वह भाव

मेरे न होते-

मेरी जिन्दगी में अगर तुम न होते।


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