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Raju Kumar Shah

Romance


4.5  

Raju Kumar Shah

Romance


अधूरी सी चाहत

अधूरी सी चाहत

1 min 210 1 min 210

कहना क्या है नहीं समझता वह,

कई बातों में छुपाकर इशारा तो करता हूं !

माना की नही मिलती निगाहें,

धड़कनों के सहारे पुकारा तो करता हूं !


ठहरो जरा दोष तकदीरों को दे दूं,

जब बन सकते थे मेरे तब मांगा नहीं,

अब मिलोगे नही यही क़िस्मत मेरी है,

फिर भी दूआओं में मांगा तो करता हूं !


कभी नींद उड़ती तो तुम्हीं सुलाते,

तुम्हीं तकलीफों में दिलासा बनके आते,

पर कहां पूरी करता रब नाजायज सी चाहें,

फिर भी, अधूरी सी चाहत को चाहा तो करता हूं !


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