STORYMIRROR

Deepali suyal Suyal

Romance

3  

Deepali suyal Suyal

Romance

अधूरी मोहब्बत

अधूरी मोहब्बत

1 min
462

तेरे सारे अरमान अधूरे रह गए

मेरे सारे इल्ज़ाम अधूरे रह गए

क्यों होती है शाम तुम्हें घर आने में

मेरे सारे सवाल अधूरे रह गए


कुछ क़िस्से अधूरे रह गए

कुछ जज़्बात अधूरे रह गए

महकती थी राते तेरे इश्क़ की स्याही से

अब सारे ख्वाब अधूरे रह गए


कुछ सपने अधूरे रह गए

कुछ बातें अधूरी रह गई

होनी थी मुलाकात अपने इश़्क की

वो बारात अधूरी रह गई


तेरा यूंँ हर बात पर हँसाना और 

मेरा तेरी बात पे खुल के यूंँ मुस्कुराना

गुम हो गई हूंँ खुद में ना जाने क्यों

अब वो मुस्कान अधूरी रह गई....


   


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance