अधूरी बात
अधूरी बात
हो नहीं पाती उनसे हमारी पूरी बात !
रह जाती है दिल में ही दबी की दबी अधूरी बात ,
सोचता हूँ मिलकर कर दूंगा बयां- ए- दिल मगर हो नहीं पाती उनसे फिलहाल कोई मुलाकात!
कबतक यूं ही रखूं निराश - ए- दिल ?
टूट रही अब तो उम्मीद की तहसील!
मिलन की जगी है दिल में अरसों से प्यास !
ऐसा नहीं है कि हम हैं दिल- ए-एय्याश!
हम तो इश्क में फनां है उनके ,
हमें फिर भी नाउम्मीदी में भी दिख रही है बरसों से उनके आने की आश !
मिलकर उसे हम हाल- ए- दिल बता देंगे,
अपने अंदर उमड़ रही विरह की पीड़ा दिल खोलकर दिखा देंगे ,
किस कदर पल- पल तड़प हूँ तेरे लिए,
बता देंगे कि उसकी उपस्थिति का क्या महत्व है मेरे लिए।
बता न तू कब आओगी ?
मेरी बगिया उजड़ी बगिया को कब हरियाली से हरा - भरा कराओगी ?
कब करोगी हमसे पूरी बात ?
बहुत छूट गई है तुमसे कहना अपनी अधूरी बात
अब तेरे बिन कटती नहीं ये बेपनाह अंधेरों भरी रात !
मेरे दिल के सूखे आँगन में कर दो न मुस्कान की मधुर बरसात ।
प्रतिपल याद आती है तेरी वो शरारत भरी दिल को सुकून पहुँचाने वाली नटखट जज्बात्।
बता दो न कब होगी हमारी पूरी बात ?

