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Brijlala Rohanअन्वेषी

Romance

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Brijlala Rohanअन्वेषी

Romance

अधूरी बात

अधूरी बात

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हो नहीं पाती उनसे हमारी पूरी बात !

रह जाती है दिल में ही दबी की दबी अधूरी बात ,

सोचता हूँ मिलकर कर दूंगा बयां- ए- दिल मगर हो नहीं पाती उनसे फिलहाल कोई मुलाकात!

कबतक यूं ही रखूं निराश - ए- दिल ?

टूट रही अब तो उम्मीद की तहसील!

मिलन की जगी है दिल में अरसों से प्यास !

ऐसा नहीं है कि हम हैं दिल- ए-एय्याश! 

हम तो इश्क में फनां है उनके ,

हमें फिर भी नाउम्मीदी में भी दिख रही है बरसों से उनके आने की आश !

मिलकर उसे हम हाल- ए- दिल बता देंगे,

अपने अंदर उमड़ रही विरह की पीड़ा दिल खोलकर दिखा देंगे ,

किस कदर पल- पल तड़प हूँ तेरे लिए, 

बता देंगे कि उसकी उपस्थिति का क्या महत्व है मेरे लिए। 

बता न तू कब आओगी ? 

मेरी बगिया उजड़ी बगिया को कब हरियाली से हरा - भरा कराओगी ?

कब करोगी हमसे पूरी बात ? 

बहुत छूट गई है तुमसे कहना अपनी अधूरी बात  

अब तेरे बिन कटती नहीं ये बेपनाह अंधेरों भरी रात !

मेरे दिल के सूखे आँगन में कर दो न मुस्कान की मधुर बरसात ।

प्रतिपल याद आती है तेरी वो शरारत भरी दिल को सुकून पहुँचाने वाली नटखट जज्बात्।

बता दो न कब होगी हमारी पूरी बात ?


   


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