STORYMIRROR

Govind Narayan Sharma

Fantasy

4  

Govind Narayan Sharma

Fantasy

अधूरे ख़्वाब

अधूरे ख़्वाब

1 min
217

मचलते दिल के अधूरे ख्वाब पूरे करने दे,

चाँद से मुखड़े पे नकाब न कर दीदार करने दे !

 

दीदार कराके दिल हद में रखने की नसीहत न दे,

उल्फ़त में तेरी इतनी तो मुझे शरारत करने दे !


तेरी सुनहरी नथनिया में नगीने सा पिरो ले,

गोरे रुखसार पे लबों से अभिसार करने दे !


पाकर तुम्हें रुबरू बल्लियों उछलता ये दिल,

वर्जनाएं तमाम तोड़ कर आलिंगन करने दे !


थक गया अब तन्हा तेरी यादों के बोझ से !

तू न सही तेरे ख्वाबों से मोहब्बत करने दे !


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Fantasy