अधूरे ख़्वाब
अधूरे ख़्वाब
मचलते दिल के अधूरे ख्वाब पूरे करने दे,
चाँद से मुखड़े पे नकाब न कर दीदार करने दे !
दीदार कराके दिल हद में रखने की नसीहत न दे,
उल्फ़त में तेरी इतनी तो मुझे शरारत करने दे !
तेरी सुनहरी नथनिया में नगीने सा पिरो ले,
गोरे रुखसार पे लबों से अभिसार करने दे !
पाकर तुम्हें रुबरू बल्लियों उछलता ये दिल,
वर्जनाएं तमाम तोड़ कर आलिंगन करने दे !
थक गया अब तन्हा तेरी यादों के बोझ से !
तू न सही तेरे ख्वाबों से मोहब्बत करने दे !
