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Pinki Khandelwal

Romance

4  

Pinki Khandelwal

Romance

अधूरा चांद...।

अधूरा चांद...।

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तुझे मैं कैसे मनाऊं,

क्या तेरे लिए चांद तारे लाऊं,

या फिर हीरे मोती लाऊं,

बोल न मेरी जानेमन क्या तेरे लिए मैं लाऊं,


सुनो...चांद तारे फिल्मों की शोभा है,

हीरे मोती तिजोरी की बन जाते शोभा है,

कुछ खास चीज हो तो फिर मेरे लिए लाओ,

हां... तो बोल न मेरी जानेमन क्या तेरे लिए मैं लाऊं,


अच्छा ...सुनो वो मोगरे के गजरे लाओ,

वो गुलाब के फूल लाओ,

मेरे बालों में सजाओ,

वो हरी लाल चुड़ियां पहनाओं,

वो प्यार से एक साड़ी ले आओ,

नहीं पसंद मुझे और कुछ,

बस मेरे लिए तो तुम्हारा साथ काफी है,

फिर भी मन हो तो ये सब भी ले आओ,


ओ हो.... क्या खेल रचती हो,

कहती भी हो पर दिखाती नहीं,

मंगवाती हो पर मांगती नहीं,

सचमुच तुम जैसा कोई नहीं,


अच्छा सुनो...पल भर मैं ला दूं सारा सामान,

पर तुम्हारे आगे सब फीका है,

क्या तारे और हीरे मोती,

सब तुम्हारी खुबसूरती से जलते हैं,

तुम्हें देख वो चांद भी शर्माता है,

कि मुझ सा प्रतिबिंब धरा पर कहां से आया है,

फिर बताओ क्या करूंगा ला के वो मैं सामान,


आ...हां सही है जब लाना नहीं कोई सामान,

तो क्यों कहते हो जानेमन क्या तेरे ही लाऊं मैं ? 


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