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V. Aaradhyaa

Tragedy

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V. Aaradhyaa

Tragedy

अभावों से भरी ये जिंदगी

अभावों से भरी ये जिंदगी

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अभावों से जन्मी पली हुई ऐ ज़िन्दगी,

अब मेरे घर ना आना तू फिर से कभी!


मेरे जीवन में हमेशा खुशियां छाई रहे,

ना शिकन मेरे मस्तक पर लाना कभी !


सुख की निद्रा में ही मुझको सोने दे अब,

दे के मुझे ठोकर ना फिर से जगाना कभी!


कैसे सीखूं भला मैं सबके बीच रहना यहाँ,

ज़रा आ के फिर से तू मुझको बताना कभी !


पल में बदलते हैं रिश्ते आज के इस दौर में,

कौन अपना और कौन पराया बताना कभी !



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