डॉ. रंजना वर्मा
Abstract
सूरज बरसाने लगा नभ से भीषण आग
करनी तेरी ही हुई अब तो मानव जाग ।
अब तो मानव जाग , काट मत पादप प्यारे
पंच तत्व का कोप , शांत करते मिल सारे ।
जैसे जलती भाड़ , भूनती जीवों को रज ,
होकर निर्मम आज, जलाता जग को सूरज ।।
सुनो चांद
कोहबर
मेरा देश
प्रिय मै गीत ...
वृक्ष की वेदन...
रोटी (ग़ज़ल)
हम हिंदुस्तान...
क्या खोया : क...
ना घमंडी वक़्त रुका, ना हम चलते गये वक़्त जैसे... ना घमंडी वक़्त रुका, ना हम चलते गये वक़्त जैसे...
पत्थर तक सीमित समझ रखी, पहचाने मोल न हीरों के। पत्थर तक सीमित समझ रखी, पहचाने मोल न हीरों के।
धड़कनें दिल की भी सुना कीजिये शौक को दिल में ज़ग़ह दीजिये। धड़कनें दिल की भी सुना कीजिये शौक को दिल में ज़ग़ह दीजिये।
प्रभू के दर्शन सहज मिले मन में सेवा के भाव तू भर। प्रभू के दर्शन सहज मिले मन में सेवा के भाव तू भर।
इस कंक्रीटों के जंगल के बाशिंदे जिसे हम सभ्य और शहरी कहते है, अपनी कभी न ख़त्म होने वाली प्यास को ... इस कंक्रीटों के जंगल के बाशिंदे जिसे हम सभ्य और शहरी कहते है, अपनी कभी न ख़त्म...
बहती हुई धीरे-धीरे मौत की साहिल पे उम्र की कश्ती है। बहती हुई धीरे-धीरे मौत की साहिल पे उम्र की कश्ती है।
कभी पतझड़ सा और कभी बसंती तड़ाग है। कभी पतझड़ सा और कभी बसंती तड़ाग है।
आज का शो बिलकुल ह्रदय को छू लिया ! हमने भी अश्रुधरा को अवाधगति से बहने दिया ! आज का शो बिलकुल ह्रदय को छू लिया ! हमने भी अश्रुधरा को अवाधगति से बहने ...
औरों में हजारों, मगर खुद में एक भी कमी नज़र न आई। औरों में हजारों, मगर खुद में एक भी कमी नज़र न आई।
एक घोंसला बनाते हैं जिसमें एक छोटी सी चिड़िया रहती है जो समझती है, हर तिनके को जानती ... एक घोंसला बनाते हैं जिसमें एक छोटी सी चिड़िया रहती है जो समझती है, ह...
मत सोच कि तू चूक गया मत मांग किसी से भीख, दया बढ़ते जा, बढ़ते जा बाधाओं से लड़ते जा नहीं... मत सोच कि तू चूक गया मत मांग किसी से भीख, दया बढ़ते जा, बढ़ते जा बाधाओं...
आंरभ से अंत का सफर तय करता है.......। आंरभ से अंत का सफर तय करता है.......।
धन बिन कैसे पढ़ना लिखना कलम फावड़ा हाथ एक है। धन बिन कैसे पढ़ना लिखना कलम फावड़ा हाथ एक है।
जो मैंने दिया था अपने माँ-बाप को, उनकी वृद्धावस्था में। जो मैंने दिया था अपने माँ-बाप को, उनकी वृद्धावस्था में।
नदी कहीं खो गई नदी कहीं है ही नहीं अब हर ओर सागर ही सागर है निरा खारा खारा सागर। नदी कहीं खो गई नदी कहीं है ही नहीं अब हर ओर सागर ही सागर है निरा खारा ...
कुछ ख्वाहिशें पूरी हो जाती है तो कुछ ख्वाहिशें अधूरी ही रह जाती हैं। कुछ ख्वाहिशें पूरी हो जाती है तो कुछ ख्वाहिशें अधूरी ही रह जाती हैं।
चलो तुमको ले कर चलते हैं, उस जहाँ में जब न होते थे ये, छल, कपट, चोरी, बलात्कार और भ्रष्टाचार, ... चलो तुमको ले कर चलते हैं, उस जहाँ में जब न होते थे ये, छल, कपट, चोरी, बलात...
चाहे जितनी ऊँची उड़ो पर ओझल, ना होने देना धरती के आंचल को... चाहे जितनी ऊँची उड़ो पर ओझल, ना होने देना धरती के आंचल को...
वही असली शिक्षा कहाँ गुरु शिष्य प्रणाली की वो पवित्र परम्परा कहाँ आज इस रिश्ते को कलंक ... वही असली शिक्षा कहाँ गुरु शिष्य प्रणाली की वो पवित्र परम्परा कहाँ आज इस...
लटकी छत को नापा करती, बिना गिरे ही सियापा करती... लटकी छत को नापा करती, बिना गिरे ही सियापा करती...