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Mayank Kumar 'Singh'

Romance

5.0  

Mayank Kumar 'Singh'

Romance

आवाज़

आवाज़

1 min
361


कोशिशों में भी तेरी आवाज़

क्यों न जाने मुझे पुकारे

रातों में कराहता बदन

फिर क्यों तुम्हें पुकारे

आवाज़ दो ना फिर मुझे

कानों को यह ध्वनि पुकारे !


मत समझो की आवाज़

छोड़ गई मुझे

सुनती थी कभी रात जग जागरण

इसलिए शायद तुझे पुकारे


आवाज़ दो ना फिर मुझे

कानों को यह ध्वनि पुकारे ! !



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