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Uma Bali

Abstract

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Uma Bali

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आत्मबोध

आत्मबोध

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तुम सुधाकर अनंत के

मैं फूल पर ओस सी

अथाह सागर तुम प्यार के 

मैं शिशु अबोध सी 🌱


तुम प्राणों में बसे प्राण 

मैं हाड़ मांस की लोथ सी

तुम जीवन की गतिशीलता

मैं चलती फिरती मौत सी🌱


तुम राग द्वेष से परे -परे

मैं “मैं “ में लिपटी डकौत सी

तुम शान्त जल निर्मल झरना

मैं कसकती सुबकती चोट सी 🌱


तुम चिरकालीन शाश्वत 

मैं क्षणभंगुर इक ज्योत सी

दिन रात हूँ प्रयासरत 

मिल जाऊँ तुममें मैं कभी 🌱

🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱


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