आसमां काला है शायद
आसमां काला है शायद
आज कल आँख कुछ रंग देखना भुल गई ..
भुली बहार के रंग हरे..
रंगो में बिखरा है बस खुन का रंग लाल
रंग बचपन के सुनहरे
ओ भी खोऐ है आजकल
प्यार का रंग गुलाबी
कहता था ये जमाना
ओ भी ढक गई बदरी
बेवफाई वाली..
केसरिया था पहचान
सन्यासी के वस्त्र का नाम
वस्त्रों में भी इन वासना झाँकने लगी है आज
पवित्रता कि क्या परिभाषा बदल गई
रिश्तों में प्यार के जहर घुल गया
उसमें भी काला रंग मोह का मिल गया…
देखा उपर.. रब से पूँछने को
ये दुनिया का हाल तेरी क्या हो गया …
उपर भी कहाँ था आसमां निला
ओ भी काला देखो जमाने संग हो गया.
